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	<title>Uncategorized Archives &#8212; YogaMyLife</title>
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		<title>भगवान ने हमें क्यों बनाया? &#8211; Why God Made Us?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Acharya Harish]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Sep 2023 08:19:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भगवान ने हमें क्यों बनाया? &#8211; Why God Made Us? शाश्त्र कहते है कि – भगवान ने हमे इस धरती पर मनुष्य रूप में इसलिए जन्म दिया ताकि हम मोक्ष प्राप्ति करे.  अपने कर्म से खुद का सुन्दर भविष्य बनाये. एक और बात; शाश्त्रों में यह भी आती है कि भगवान बोरियत महसूस कर रहे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: center;">भगवान ने हमें क्यों बनाया? &#8211; Why God Made Us?</h3>
<p>शाश्त्र कहते है कि – भगवान ने हमे इस धरती पर मनुष्य रूप में इसलिए जन्म दिया ताकि हम मोक्ष प्राप्ति करे.  अपने कर्म से खुद का सुन्दर भविष्य बनाये.</p>
<p>एक और बात; शाश्त्रों में यह भी आती है कि भगवान बोरियत महसूस कर रहे थे और उन्होंने सोचा कि मैं एक से अनेक हो जाऊ और फिर उनके उस संकल्प से ही एक से अनेकता होने लगी.</p>
<p>इसका मतलब हम भगवान को इंसान जैसा सोच रहे है. यानि इंसान का एक ऐसा रूप जो हम इंसानों से ज्यादा पावरफुल हो. क्यूंकि बोरियत किसी का माइंड महसूस कर सकता है लेकिन चेतना नहीं. क्यूंकि जैसे ही हम चेतन होते है तो हमारा माइंड गायब हो जाता है.</p>
<p>अब अगर अभी एक मिनट के लिए चेतन होते है तो आप पायंगे कि आपकी सोचे आपके विचार रुक गए है या गायब हो गए है.</p>
<p>अब दूसरी बात कि मोक्ष के लिए भेजा,  तो यह आईडिया भी हमारे बेसिक प्रश्न का उतर नहीं देता. मोक्ष का मतलब कि हमें आजाद नहीं है. आजाद नहीं है तो फिर किसके गुलाम है, क्या भगवान के या फिर किसी और के. यह प्रश्न और भी उलझा देता है.</p>
<p>बहुत सोचने पर भी हमारा मन इस प्रश्न का हल नहीं ख़ोज पाता . क्यूंकि इस प्रश्न का उत्तर हमारे मन के अंदर है ही नहीं. क्योंकि हमारे मन की अपनी लिमिट्स है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: center;">अब अगर मन के पास इस प्रश्न का उतर नहीं है तो फिर किसके पास है?</h2>
<p>इस प्रश्न का उतर पाने के लिए हमें अध्यात्म को समझना होगा, श्रीमद्भागवद्गीता, श्रीमद्भागवद्गीता में श्री कृष्ण ने अपने स्वरुप को अध्यात्म बताया है. ऐसा श्रीमद्भागवद्गीता के आठवें अध्याय में श्री कृष्ण द्वारा कहा गया है. मज़े की बात यह है कि भगवान श्री कृष्ण श्रीमद्भागवद्गीता में भगवान को व्यक्ति के रूप में मानने वालों को मुर्ख बताते है लेकिन फिर भी हम इस बात के सही मतलब को अनुभव में नहीं ला पाते. इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता बस एक प्रश्न आपके दिमाग में छोड़ना चाहता हूँ.</p>
<p>अब फिर से अध्यात्म पर आता हूँ. अध्यात्म का मतलब है, खुद को जानना. मैं कौन हूँ इस बात को जानना. जब कोई जीव खुद को जान जाता है तो उसे इस प्रश्न का उत्तर भी खुद से मिल जाता है कि भगवान में उसे क्यों बनाया था.</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-1189 size-medium" src="https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-242x300.jpg" alt="Jai Durga" width="242" height="300" srcset="https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-242x300.jpg 242w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-827x1024.jpg 827w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-768x951.jpg 768w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-1240x1536.jpg 1240w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-1654x2048.jpg 1654w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-600x743.jpg 600w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2023/09/pexels-subhasish-baidya-7035900-150x186.jpg 150w" sizes="(max-width: 242px) 100vw, 242px" /></p>
<p>लेकिन थोडा और इस प्रश्न पर विचार करे तो बहुत सारी बातें दिमाग में आती है. क्यूंकि भगवान का बनाया हुआ कुछ भी बिना मतलब के नहीं है. सब कुछ वैज्ञानिक है. इस दुनियां की हर चीज वैज्ञानिक है. इसलिए जो  भी शक्ति इस संसार के पीछे है, जिसे हम भगवान कह सकते है – उस शक्ति का हमें लेकर कोई न कोई मकसद तो है ही. हम जी कर कुछ न कुछ तो ऐसा कर रहे है जो कि बहुत जरुरी है उस शक्ति के लिए. बाकि सब बातें तो हमें इस दुनियां में टिकाने के लिए है, जैसे हमारी इच्छाएं, हमारे रिश्ते नाते, हमारी सांसारिक जरूरते, सब कुछ.</p>
<p>कुछ न कुछ तो ऐसा है जो हमें करते है और उस से किसी न किसी को कोई न कोई फायदा तो हो रहा है. बस इसी प्रश्न को बार बार सोचना होगा. क्यूँ हूँ मैं? क्या कर रहा हूँ मैं? अगर भगवान मुझे पैदा कर सकते है तो क्या मोक्ष नहीं दिला सकते? क्यूंकि हमें चलाने वाली शक्ति हमारे विचारों के माध्यम से हमसे जो कुछ भी करवाना चाह रही है वो हम करते चले जा रहे है. यदि हम वो न करे तो हमारा जीवन नीरस होने लगता है और हम अकर्मण्यता के शिकार होकर डिप्रेशन का शिकार हो जाते है. हमारा माइंड यानि हमारा मन एक बेहद ही जटिल और शक्तिशाली तंत्र है. जो है तो सही; पर हमें दिखाई नहीं देता. यही तंत्र यानि हमारा माइंड ही हमें एक चक्र के उलझाये रखता है. जिसे हम जीवन और मृत्यु कह सकते है.</p>
<p>शायद इसी चक्र को तोड़ देना ही मोक्ष है. क्यूंकि हमारा जीना बिल्कुल भी हमारे बस में नहीं है. इंसान ने इस धरती पर आने के बाद कितनी भी तरक्की कर ली है लेकिन वो मौत की गुत्थी को नहीं सुलझा सका है.</p>
<p>हमें इस प्रश्न का उत्तर साइंटिफिक तरीके से खोजना होगा तभी हम खुद के होने को समझ पाएंगे और तभी हमारे दुःख भी कम हो जायेंगे. हमारा जीवन भी आसान हो जायेगा.</p>
<p>मैं जानता हूँ कि मैंने अपने टॉपिक – “भगवान ने हमें क्यूँ बनाया होगा” – का जवाब नहीं दिया. शाश्त्रों में से कही न कही शब्दों के माध्यम से इसका जवाब मैं भी दे सकता था. लेकिन मैं वैसा जवाब देना नहीं चाहता और न ही वैसा सोचन चाहता हूँ. बस मैं तो मौलिक रूप से सोचने की बात करता हूँ.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>Gayatri Mantra Healing</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Acharya Harish]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Jan 2023 12:38:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गायत्री मन्त्र हीलिंग से क्या होता है? एक है गायत्री मंत्र जिसकी मदद से हम खुद की हीलिंग कर सकते हैं। इस मंत्र के द्वारा हम अपने सूर्य को पुष्ट कर सकते हैं इसके अलावा हम अपने अग्नि तत्व को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ साथ हम अपने मणिपुर चक्र को सही कर सकते हैं। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>गायत्री मन्त्र हीलिंग से क्या होता है?</h2>
<p>एक है गायत्री मंत्र जिसकी मदद से हम खुद की हीलिंग कर सकते हैं। इस मंत्र के द्वारा हम अपने सूर्य को पुष्ट कर सकते हैं इसके अलावा हम अपने अग्नि तत्व को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ साथ हम अपने मणिपुर चक्र को सही कर सकते हैं। कई बार जीवन में ऐसा होता है कि सब कुछ होते हुए भी हमारे अंदर आत्मविश्वास नहीं होता। आत्मविश्वास के लिए हम बहुत सारी मोटिवेशनल किताबें पढ़ते हैं, बहुत सारे मोटिवेशनल लेक्चर सुनते हैं, और खुद को बहुत सारी एफिरमेशंस देते हैं, लेकिन फिर भी हमारा आत्म विश्वास नहीं बढ़ता। ऐसे में समझ नहीं आता कि क्या किया जाए? कई बार तो आत्मविश्वास इतना कम होता है कि अपने घर में ही अपने घर के सदस्यों से बात करने में भी डर लगता है। किसी का भी सामना करने में डर लगता है। स्टेज पर बोलने में डर लगता है। टीचर के सामने बोलने में डर लगता है। बिजनेस मीटिंग के लिए जा रहे हैं उसका सामना करने में डर लगता है। अपने से छोटे इंसान के साथ बात करने में भी डर लगता है, और बड़े इंसान के साथ बात करने में तो डर लगता ही है।</p>
<h2>क्या आत्मविश्वास पाने के लिए कोई मेडिसिन है?</h2>
<p>इसके लिए कोई मेडिसिन नहीं है कि यह समस्या ठीक हो जाए।</p>
<p>यह होता इसलिए है क्योंकि मणिपुर चक्र और अग्नि तत्व कमजोर होता है। इसको ठीक करने का तरीका एक ही है अग्नि तत्व और मणिपुर चक्र को ठीक कर लिया जाए।</p>
<p>अब बात यह आती है कि अग्नि तत्व या मणिपुर चक्र ठीक होंगे कैसे? इसके लिए हमें ध्यान सीखना होगा तत्व साधना सीखनी होगी, चक्र साधना सीखनी होगी।<br />
तत्व साधना, चक्र साधना सीख कर ही हम अपने अग्नि तत्व ठीक कर सकते हैं। चक्र साधना और तत्व साधना सीखने से पहले ध्यान के द्वारा हमें अपनी एकाग्रता को बढ़ाना होगा क्योंकि बिना एकाग्रता से तत्व साधना या चक्र साधना नहीं की जा सकती है।</p>
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		<title>Healing Why &#038; How &#8211; हीलिंग क्यों और कैसे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Acharya Harish]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Jan 2023 09:17:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत में हीलिंग का एक बहुत बड़ा इतिहास रहा है प्राचीन ऋषि अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते थे या उन लोगों के पास जो आमजन आते थे दुख लेकर उनको आशीर्वाद दिया करते थे। वह एक प्रकार की हीलिंग ही थी। हालांकि हीलिंग नाम का शब्द हमारे ग्रंथों विद्यमान नहीं है, लेकिन हिलिंग का जो [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में हीलिंग का एक बहुत बड़ा इतिहास रहा है प्राचीन ऋषि अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते थे या उन लोगों के पास जो आमजन आते थे दुख लेकर उनको आशीर्वाद दिया करते थे।<br />
वह एक प्रकार की हीलिंग ही थी। हालांकि हीलिंग नाम का शब्द हमारे ग्रंथों विद्यमान नहीं है, लेकिन हिलिंग का जो सोर्स है वह भारतीय ग्रंथ ही हैं। हीलिंग एक तरह की पद्धति है जिसमें हम प्राण ऊर्जा की मदद से प्राण शरीर को ठीक करके स्थूल शरीर में पैदा हुई बीमारियों को ठीक कर लेते हैं । भारतीय परंपरा के अनुसार हीलिंग कई प्रकार की होती है। खास तौर पर पांच तत्वों से हम हीलिंग करते हैं। यह पांच तत्व है, पृथ्वी जल, अग्नि, वायु और आकाश। इन पांच तत्वों से ही हमारा शरीर बना हुआ है। इसलिए इन पांच तत्वों की हीलिंग करके हम अपने शरीर की हर समस्या को दूर कर सकते हैं। उसके बाद कॉस्मिक लाइट से हील करते हैं मंत्रों से हीलिंग करते हैं ।अलग-अलग प्रकार के मंत्र अलग-अलग प्रकार की हीलिंग में काम आती है। जैसे अगर किसी का सूर्य कमजोर हो गया हो यानी अग्नि तत्व कमजोर हो गया हो तो उसके लिए हम गायत्री मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि गायत्री मंत्र जो है वह सूर्य से संबंधित है और वह हमारे शरीर के अंदर अग्नि तत्व या फिर मणिपुर चक्र को बल देता है।<br />
जब जीवन के अंदर कोई रास्ता ना मिल रहा हो तब पांवमान मंत्र की लिखी जाती है पवमान मंत्र जो है इस प्रकार से है</p>
<p>असतो मा सद्गमय<br />
तमसो मा ज्योतिर्गमय<br />
मृत्योर्मा अमृतम्</p>
<p>इस मंत्र की लगातार 40 दिन तक रोजाना 108 बार जपने से यानी एक माला जपने से आपको खुद ब खुद रास्ता देखने लगता है मंत्र हीलिंग है जो निश्चित तौर पर काम करती है।</p>
<p>भारतीय ग्रंथों के अनुसार हम ग्रहों की मदद से हीलिंग कर सकते हैं। हमारे ग्रह और हमारे नक्षत्र जब हमारे अनुसार काम नहीं करते तब हमें उनकी हीलिंग करनी पड़ती है। इन ग्रहों के और इन नक्षत्रों के अपने मंत्र हैं और इन ग्रहों के और नक्षत्रों के अपने देवता भी हैं। उन देवताओं को ध्यान में रखते हुए और उनके मंत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष विधि के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है, या यूं कह सकते हैं कि हीलिंग की जाती है। इस प्रकार से हम यह समझ सकते हैं कि हिलिंग का हम प्रयोग विभिन्न तरीकों से और विभिन्न व्यक्तियों के लिए, विभिन्न स्थितियों के लिए भी कर सकते हैं हीलिंग का प्रयोग हम आपसी संबंधों को सुधारने के लिए कर सकते हैं, बीमारी को ठीक करने के लिए कर सकते हैं , किसी जगह पर नकारात्मक उर्जा हो उस उर्जा को ठीक करने के लिए ही हीलिंग का प्रयोग कर सकते हैं इस प्रकार से फीलिंग के अनूठे प्रयोग हैं और उसके अनूठे रिजल्ट भी हैं, लेकिन हीलिंग करने से पहले उसको सीखना बहुत जरूरी है क्योंकि बगैर सीखे अगर कोई हीलिंग करता है तो उसके रिजल्ट नहीं मिलते हैं क्योंकि इसके भी अपने नियम हैं कायदे हैं तरीके हैं।</p>
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		<title>Story Root Chakra &#8211; मूलाधार चक्र</title>
		<link>https://www.yogamylife.org/uncategorized/story-of-root-cahkra-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Acharya Harish]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Sep 2021 09:01:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्यरूप से 7 चक्र मानव शरीर में  मुख्यरूप से कुल 7 चक्र होते है. मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार. हर चक्र की अपनी एक ख़ासियत है. यह मानव उर्जा के ऐसे स्थान है जहाँ विभिन्न कार्यो के लिए उर्जा एकत्रित होती है. यानि यह 7 चक्र एक तरह से घुमती हुई उर्जा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3>मुख्यरूप से 7 चक्र</h3>
<p>मानव शरीर में  मुख्यरूप से कुल 7 चक्र होते है. मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार. हर चक्र की अपनी एक ख़ासियत है. यह मानव उर्जा के ऐसे स्थान है जहाँ विभिन्न कार्यो के लिए उर्जा एकत्रित होती है.</p>
<p>यानि यह 7 चक्र एक तरह से घुमती हुई उर्जा के 7 पुंज है. यहाँ उर्जा कम और अधिक होती रहती है. इसके कम या अधिक होने से हमारे जीवन पर अलग अलग प्रकार से प्रभाव है.</p>
<h3>पहला चक्र मूलाधार चक्र</h3>
<p>इस श्रंखला का पहला चक्र मूलाधार चक्र है. इसका यंत्र 4 पंखुड़ियों वाला एक लाल रंग का फूल है जो ऊपर की ओर खिला हुआ है. इन 4 पंखुड़ियों पर 4 अक्षर खुदे हुए है. पहला अक्षर स है दूसरा व् तीसरा श और चोथा ष है.</p>
<p>यह हमारी गुदा और जेनिटल organ के बीच स्थित है.</p>
<p>मूलाधार चक्र का एक खास फ्रीक्वेंसी पर घूम रहा है इसलिए यह एक खास तरह की आवाज़ कर रहा है. इसके इस तरह से चक्र के रूप में घुमने से जो आवाज़ निकल रही है वो आवाज़ लं जैसी है इसलिए इसका मन्त्र लं है.</p>
<h4>मूलाधार चक्र का तत्व पृथ्वी</h4>
<p>हर चक्र एक तत्व से सम्बंधित होता है ऐसे ही मूलाधार चक्र के साथ भी है. मूलाधार चक्र का तत्व पृथ्वी है. इसके तत्व पृथ्वी कर यंत्र पीले रंग का एक वर्ग है. मूलाधार चक्र का रंग लाल है और इसके तत्व पृथ्वी का पीला.</p>
<p>इसके बढ़ने और घटने की वजह से हमारे जीवन में बहुत सारे बदलाव होने लगते है. यह हमारी मूलभूत सुविधाओं से सम्बन्ध रखता है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-1081" src="https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4.jpg" alt="Root Chakra" width="1920" height="1080" srcset="https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4.jpg 1920w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4-600x338.jpg 600w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4-300x169.jpg 300w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4-1024x576.jpg 1024w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4-768x432.jpg 768w, https://www.yogamylife.org/wp-content/uploads/2021/09/4-1536x864.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1920px) 100vw, 1920px" /></p>
<p>जब इस चक्र पर उर्जा बढ़ने लगती है तो मूलभूत सुविधाएँ तो बढ़ जाती है लेकिन जीवन में सम्बन्ध बिगड़ने लगते है. जीवन में सब कुछ होते हुए भी कुछ भी अच्छा नहीं लगता. जीवन में तनाव बढ़ जाते है और तनाव अधिक बढ़ जाने से कई तरह की बीमारियाँ शरीर में पैदा हो जाती है. रात को नींद नहीं आती.</p>
<p>जब यह तत्व घट जाता है तो उर्जा का बहाव यहाँ घट जाता है. ऐसा होने पर मूलभूत सुविधाएँ जीवन में घटनी शुरू हो जाती है. जीवन में हर जगह अभाव ही अभाव दिखाई देता है. जीवन को लक्ष्य नहीं मिल पाता है.</p>
<p>इस चक्र का सही होना एक संतुलीय जीवन के लिए बेहद जरुरी है.</p>
<p>इस चक्रों को और इसके तत्व को सही करने के लिए चक्र साधना और तत्व साधना का हम सहारा ले सकते है.</p>
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