
सिर्फ एक गलती, और कुण्डलिनी मोक्ष नहीं नरक का रास्ता बन सकती है.
अगर आप कुण्डलिनी साधना करते है तो आपको यह बातें अवश्य मालूम होनी चाहिए.
मैं अपनी बात शुरू करूगा मेरे अपने एक शिष्य के अनुभव से, जिसने खुद से कुण्डलिनी साधना शुरू की थी और बाद में ऐसी स्थिति में फंस गया था, जहां खुद से उसका निकालना नामुमकिन था.
शुभम मेरे पास जब आया था तो उसकी कुण्डलिनी मूलाधार चक्र से उठते ही राइट साइड की ओर मुड़ कर स्वाधिष्ठान चक्र पर अपने बैड इफेक्ट (Bad Effects) दिखा रही थी. यह मैंने उसके शरीर को देखते ही समझ गया था. उसके चलने के तरीके से भी मुझे पता चल गया था कि गडबड़ी कहा हुई है.
उसकी रिलेशनशिप अत्याधिक बिगड़ चुकी थी. आर्थिक स्थिति भी खराब हो चुकी थी. वजह कुण्डलिनी का मूलाधार चक्र से ही अपना रास्ता बदल लेना था.
शुभम जो कुछ भी प्रयास करता था विफल हो जाता था. बड़ी खतरनाक स्थिति में फँसा था.
शरीर में भी अजीब तरह के दर्द और असहजता हो रही थी. नींद आती ही नहीं थी.
मैंने शुभम के केस की हर बात को अच्छे से स्टडी किया और उसे कुण्डलिनी के बारे मे 3 बाते बतायी.
यह 3 बातें शुभम को नहीं पता थी और ना ही उसने इन तीन बातों पर कभी अमल नहीं किया था.
3 विशेष बातें
- कुण्डलिनी जब मूलाधार चक्र से ऊपर उठती है तो यह सबसे खतरनाक होती है.
- कुंडलिनी जागरण के दौरान पंच तत्वों से अर्थिंग करना बहुत आवश्यक होता है.
- कुंडलिनी जब बिगड़ जाए तो उसकी हीलिंग करवानी चाहिए.
इन 3 बातों को हर कुण्डलिनी साधक को पता होनी चाहिए. नहीं पता होगा तो शुभम जैसी हालत होगी ही.
हर किसी के लिए अलग समाधान
शुभम की अवस्था को ठीक होने में 3 से 4 महीनों का समय लग गया था. समाधान क्यूंकि हर किसी के लिए अलग होता है, इसलिए समाधान के बारे मे यहां चर्चा नहीं की जा सकती थी.