कितने दिनों में कुण्डलिनी जागरण शुरू होता है?

कुंडलिनी एक ऐसी शक्ति है जो हर मानव के भीतर विराजमान है फिर चाहे वो किसी भी धर्म से संबंधित हो। दुनियां भर में बहुत सारे लोग कुण्डलिनी जागरण के इच्छुक होते है। उनमें से बहुत सारे लोग प्रयास भी करते है लेकिन सफल केवल कुछ लोग हो हो पाते है।

बहुत सारे लोगों के मनों में यह एक प्रश्न बार-बार आता है कि वो यदि इस प्रक्रिया को शुरू करें तो कितने दिन लग जाएंगे जागरण में! लेकिन आमतौर पर इस प्रश्न का जवाब उन्हें कहीं लिखा नहीं मिलता न ही कोई वीडियो इसके बारे में सही समय बताता है।

कुंडलिनी जागरण का मतलब क्या है?

यह बात हर एक साधक को जाननी चाहिए कि आखिर कुंडलिनी जागरण का मतलब है क्या। क्या कुण्डलिनी जागृत होते ही सभी चक्रों को पार कर सहस्त्रार चक्र को क्रॉस करके पूर्ण ऊर्जा में समा जाती है? या फिर कुछ और होता है?

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कुंडलिनी जागरण का मतलब होता है कि कुंडलिनी अपने मूल स्थान को छोड़ कर सुषुम्ना नाड़ी में गतिशील हो जाए। यह एक शुरुआती प्रक्रिया है और सामान्य शब्दों में इसे ही कुण्डलिनी जागरण कहते है।

वास्तिक कुंडलिनी जागरण क्या होता है?

वास्तविक कुंडलिनी जागरण शिव और शक्ति का मिलन है। वो मिलन तब ही मुमकिन हो सकता है जब कुण्डलिनी सभी पड़ावों को पार करके सहस्त्रार चक्र को पार करके पूर्ण सत्य स्वरूप शिव से मिल जाए। यानि शिवा और शिव एक हो जाएं।

कितना समय लगेगा कुंडलिनी जागरण में

याद रखिए कुंडलिनी जागरण का मतलब है कि साधक कुण्डलिनी को मूलाधार चक्र से गति देकर ऊपर की ओर ले जाने में सक्षम हो जाए। हालांकि कि कुछ लोग इसे आंशिक कुंडलिनी जागरण का नाम भी देते है।

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यदि आप नियमित रूप से 90 दिनों तक अपनी एकाग्रता को शुद्ध करके मूलाधार पर कुंडलिनी प्रक्रिया संख्या 1 का प्रयोग करते है तो कुण्डलिनी मूलाधार चक्र को छोड़ देगी और कुंडलिनी जागरण हो जायेगा। लेकिन याद रखे इसे भूल से भी पूर्ण कुण्डलिनी जागरण नहीं मान लीजिएगा। क्योंकि रास्ता लंबा है और अभी आगे भी जाना है।

कई साधक ऐसे भी होते है जिनका मूलाधार चक्र जल्दी से कुंडलिनी को छोड़ता नहीं है। उन्हें यदि 90 दिन में रिजल्ट्स नहीं मिलता तो फिर उन साधकों को कुण्डलिनी प्रक्रिया संख्या 2 का प्रयोग करना पड़ता है। लगभग सभी साधकों की कुण्डलिनी पहली 2 प्रक्रियाओं से जागृत हो जाती है।

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मेरे अनुभव में अभी तक एक भी साधक नहीं आया है जिसकी कुण्डलिनी को तीसरी प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ी हो।

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