क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांडीय नक्षत्रों की स्थिति आपकी कुंडलिनी साधना को कितनी गहराई से प्रभावित कर सकती है? आज हम बात करेंगे रोहिणी नक्षत्र की, जो चंद्रमा का नक्षत्र है और इसका कुंडलिनी जागरण में, विशेषकर स्वाधिष्ठान चक्र के भेदन में, क्या महत्व है।
चंद्रमा, जल तत्व और स्वाधिष्ठान चक्र का संबंध
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। ज्योतिष और योग विज्ञान के अनुसार, चंद्रमा का सीधा संबंध ‘जल तत्व’ (Water Element) से है। हमारे शरीर में जल तत्व का प्रतिनिधित्व स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) करता है। यही कारण है कि जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में होता है, तो उसका सीधा प्रभाव हमारे स्वाधिष्ठान चक्र पर पड़ता है।
साधक स्वाधिष्ठान चक्र पर क्यों अटक जाते हैं?
कुंडलिनी जागरण की यात्रा में स्वाधिष्ठान चक्र सबसे कठिन पड़ावों में से एक है। यह भावनाओं (Emotions) का केंद्र है। जब कुंडलिनी ऊर्जा इस चक्र पर पहुंचती है, तो साधक के भीतर दबी हुई भावनाएं ज्वार की तरह उमड़ पड़ती हैं।
साधक को अपने ही डर, असुरक्षा और पुरानी दबी हुई भावनाओं से लड़ना पड़ता है। यह मानसिक संघर्ष इतना तीव्र होता है कि कई साधक भयभीत होकर अपनी साधना बीच में ही छोड़ देते हैं।
गुरु और रोहिणी नक्षत्र की भूमिका
यहीं पर एक समर्थ गुरु की आवश्यकता होती है। गुरु जानते हैं कि यह भावनात्मक तूफ़ान आएगा ही। ऐसे समय में, रोहिणी नक्षत्र एक वरदान साबित होता है।
यदि रोहिणी नक्षत्र में पूर्णिमा (Full Moon) का संयोग बन जाए, तो यह स्वाधिष्ठान चक्र से कुंडलिनी को ऊपर उठाने का सबसे स्वर्णिम अवसर होता है। चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा इस चक्र के अवरोधों को खोलने में मदद करती है।
साधना की विधि (The Technique)
हालाँकि, प्रत्येक साधक के संस्कार और ऊर्जा का स्तर अलग होता है, इसलिए इसकी विशिष्ट गुप्त क्रियाएं (Kriyas) गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत ही दी जाती हैं। उन विशेष विधियों के लिए आप हमसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।
परंतु, एक सामान्य विधि जिसे साधक अपना सकते हैं, वह इस प्रकार है:
रोहिणी नक्षत्र के दौरान ध्यान में बैठें।
चंद्रमा की शीतल और सौम्य ऊर्जा का आवाहन करें।
इस ऊर्जा को अपने स्वाधिष्ठान चक्र के बिल्कुल मध्य बिंदु (Center) पर केंद्रित करें।
धीरे-धीरे भावना करें कि चंद्रमा की ऊर्जा पूरे चक्र में फैल रही है और उसे शुद्ध कर रही है।
रोहिणी नक्षत्र और चंद्र ऊर्जा का यह अद्भुत मिलन कुंडलिनी को ऊपर की ओर (ऊर्ध्वगामी) ले जाने में चमत्कारी परिणाम देता है।
आपके अनुभव
क्या आपने कभी चंद्रमा की ऊर्जा या रोहिणी नक्षत्र के दौरान ध्यान साधना की है? क्या आपने अपनी भावनाओं में कोई बदलाव महसूस किया है? अपने अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ अवश्य साझा करें।


