Author: Acharya Harish
मूलाधार चक्र ही ध्यान भटकाता है – जानिए क्यों?
मूलाधार चक्र

मूलाधार चक्र की 4 पंखुड़ियां होती है. इन चार पंखुड़ियों पर होती है 4 शक्तियां. इन शक्तियों में इतना आकर्षण होता है कि हमारी इन्द्रियों को इस संसार की ओर आकर्षित किए रखती है. संसार के जितने भी आकर्षणों के प्रति हम आकर्षित होते है उनके पीछे मूलाधार चक्र की शक्तियां काम कर रही होती है. कभी एक शक्ति तो कभी एक से अधिक शक्तियां हमारी सभी इच्छाओं के पीछे काम कर रही होती है.
हमारा मन
हमारा मन सबसे अधिक इसी चक्र से attached रहता है. यानि मन का कार्य एक तरह से इंसान को मूलाधार चक्र की शक्तियों के साथ लगातार जोड़े रखना होता है. इसलिए ही मन लगातार इस तरह के विचार पैदा करता रहता है. मूलाधार चक्र सबसे रहस्यमय है. रहस्यमयी शक्तियों से भरपूर चक्र के पास Positive और Negative दोनों तरह की शक्तियां विद्यमान होती है.
ध्यान और मन
ध्यान में अगर कोई चक्र सबसे अधिक भटकाता है तो वो है मूलाधार चक्र. ध्यान के दौरान सबसे अधिक विचार भी यही चक्र उत्पन्न करता है. जब आप ध्यान करते है तो यह महसूस कर सकते है और यह बात समझ सकते है कि अधिकतर विचार मूलाधार चक्र से संबंधित ही दिमाग में आ रहे है.
मूलाधार चक्र का तत्व
हर चक्र के बीचो बीच होता है उसका तत्व. मूलाधार चक्र का तत्व है पृथ्वी. पृथ्वी तत्व का रंग पीला होता है और इसे पीले रंग के एक वर्ग से प्रदर्शित किया जाता है. हर चक्र के तत्व की खासियत होती है कि वो उस चक्र को बैलेंस कर सकता है.
मूलाधार चक्र जब असंतुलित हो जाता है तो इसके तत्व पृथ्वी के माध्यम से ही इसे संतुलित किया जाता है.
कुण्डलिनी जागरण और समय की चुनौती
कुण्डलिनी को समझना आवश्यक है
कुण्डलिनी जागरण केवल एक आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विचारों और समय के बंधन से मुक्ति की यात्रा भी है। शब्द कुण्डलिनी जितना सरल लगता है, उसका जागरण उतना ही गहन और रहस्यमय है।
साधना की शुरुआत हमेशा मन को एकाग्र करने से होती है। जब साधक अपने भीतर एक ऐसा स्थान बना लेता है जहाँ विचारों का आक्रमण उसे विचलित न कर सके, तभी साधना का वास्तविक आधार तैयार होता है। इस अभ्यास से मन शुद्ध होता है और धीरे-धीरे चेतना का उदय होता है।
विचारों से संघर्ष
चेतना और चक्रों की यात्रा
जब चेतना उत्पन्न होती है, साधक अपने ही मन से अलगाव का अनुभव करता है। यही चेतना मूलाधार चक्र पर केंद्रित होकर कुण्डलिनी को जागृत करती है। जैसे-जैसे कुण्डलिनी विभिन्न चक्रों को पार करती है, चेतना का स्वरूप बदलता जाता है और साधक को आगे की आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाता है।
विचारों पर विजय प्राप्त करने के बाद अगली चुनौती होती है—समय। ध्यान के दौरान बार-बार घड़ी देखने की इच्छा, समय का अहसास कराना—ये सब संकेत हैं कि समय भी साधना में बाधक बन सकता है। समय चेतना को बाहर की ओर खींचता है और साधक को वर्तमान में बाँधकर रखता है।
समय की बाँधा
समाधान
- सबसे पहला उपाय है सजगता। जब साधक यह जान लेता है कि समय भी ध्यान भंग कर सकता है, तो वह उसके प्रति सतर्क हो जाता है। यही जागरूकता समय की बाँधा से मुक्ति का मार्ग है।
- दूसरा उपाय है श्वास का रहस्य। सांसों को समझना और उनके प्रवाह में एकाग्र होना साधक को समय से परे ले जाता है। जब यह रहस्य खुलता है, तब साधक समय को लांघकर उस खेल से बाहर निकल जाता है जिसमें वह बंधा हुआ था। यही क्षण Self-Realization का होता है।
“क्या आपने ध्यान साधना में समय की बाँधा का अनुभव किया है? अपने विचार कमेंट में साझा करें।”
कुण्डलिनी जागरण: क्या यह वाकई पूर्ण है या सिर्फ एक भ्रम?
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में ‘कुण्डलिनी जागरण’ शब्द बहुत आम हो गया है। अक्सर लोग कहते मिलते हैं— “मेरी कुण्डलिनी तो जागृत हो गई, पर जीवन में कुछ बदला नहीं।” या “शुरुआत में कुछ झटके महसूस हुए, फिर सब शांत हो गया।”
अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो यह लेख आपके लिए है। आज हम उस कड़वे सच पर चर्चा करेंगे जिसे अक्सर ‘गुरु’ और ‘साधक’ नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
कुण्डलिनी जागरण का ‘बाज़ारी’ मतलब
आजकल कुण्डलिनी जागरण को एक प्रोडक्ट की तरह बेचा जा रहा है। ध्यान के दौरान रीढ़ की हड्डी में थोड़ी सी झनझनाहट या मूलाधार चक्र (Root Chakra) पर होने वाली हलचल को ही ‘पूर्ण जागरण’ का नाम दे दिया जाता है।
कई गुरु अपने शिष्यों को महज़ कुछ अनुभवों के आधार पर “कुण्डलिनी सिद्ध” होने का सर्टिफिकेट थमा देते हैं। साधक भी इसी आत्ममुग्धता में जी रहा है कि वह परम ज्ञान को पा चुका है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है।
क्या है जागरण की असली प्रक्रिया?
कुण्डलिनी शक्ति का निवास मूलाधार चक्र में है। जब यह शक्ति जागती है, तो यह सुषुम्ना नाड़ी के मार्ग से ऊपर की ओर बढ़ती है।
- भ्रम: मूलाधार में हलचल हुई = कुण्डलिनी जाग गई।
- सत्य: यह केवल यात्रा की शुरुआत है, मंजिल नहीं।
मूलाधार से शक्ति का उठना वैसा ही है जैसे किसी लंबी यात्रा के लिए घर से बाहर पहला कदम रखना। यदि आप घर की दहलीज पार करके ही खुद को यात्री समझ बैठें, तो आप गंतव्य तक कभी नहीं पहुँच पाएंगे।
मूलाधार के बाद की चुनौतियाँ
असली संघर्ष और साधना मूलाधार चक्र के बाद शुरू होती है। जैसे-जैसे कुण्डलिनी ऊपर की ओर बढ़ती है, साधक को दो प्रमुख मोर्चों पर काम करना पड़ता है:
- शारीरिक स्पन्दन: शरीर के अलग-अलग अंगों में खिंचाव, गर्मी या विशेष प्रकार की संवेदनाएं।
- मानसिक उथल-पुथल: हर चक्र को पार करने पर पुराने संस्कार और विचार सतह पर आते हैं। यहाँ साधक का धैर्य और उसकी मानसिक तैयारी की परीक्षा होती है।
जब मार्ग अवरुद्ध हो जाए…
याद रखिए, कुण्डलिनी एक प्रचंड ऊर्जा है। यदि इस ऊर्जा को सही मार्ग (सुषुम्ना) नहीं मिला, तो यह लाभ के बजाय हानि पहुँचा सकती है।
- यदि कुण्डलिनी बीच में कहीं अटक जाए, तो साधक भ्रमित, चिड़चिड़ा या मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।
- साधना का मुख्य उद्देश्य ही ऊर्जा के लिए मार्ग को साफ (Purification) रखना है।
The Mystery of the Third Eye: Beyond What the Eyes Can See
Right between our eyebrows lies a powerful point known as the Third Eye (Ajna Chakra). It is often called the gateway to the soul, and for a spiritual seeker, this is where the most profound experiences begin. When this center activates, it doesn’t just change your vision—it transforms your entire life.
What is the Third Eye, Really?
It is important to understand that the Third Eye is not a physical organ.
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A Subtle Tool: It is a non-physical energy center that develops gradually.
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Internal Experience: Once active, its presence is felt only by the practitioner. Others cannot see it, though a realized master (Siddha Purush) can often sense its radiance on your face.
How to Perceive Your Third Eye
You don’t need complex tools to check the status of your Third Eye. Follow these simple steps:
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Sit in a comfortable meditative posture.
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Gently close your eyes.
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With your eyes closed, try to “look” at the space between your eyebrows.
The Reading:
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Total Darkness: If you only see black, your Third Eye is currently dormant.
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Colors & Light: If you see swirling colors or flashes of light, it means your Third Eye is beginning to develop and stir.
The Right Way to Meditate on the Third Eye
Many people try to focus on the Third Eye directly, but without preparation, results can be slow. Here is the recommended path:
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Build Concentration (Tratak): Before focusing on the Third Eye, practice Tratak (gazing at a candle flame or a point). This stabilizes the wandering mind.
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Increase Energy (Yoga Nidra): Use Yoga Nidra to build your spiritual energy reserves. This provides the “fuel” needed for the Third Eye to awaken.
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Observe the Colors: As you meditate, you will notice colors emerging. These colors are not random; each shade indicates a specific stage of your spiritual progress.
Expert Advice: Direct meditation on the Third Eye is possible, but for faster and safer results, always strengthen your concentration and energy levels first.
थर्ड आई (तीसरी आँख): क्या है इसका रहस्य और कैसे करें इसे सक्रिय?
अक्सर कहा जाता है कि दो आँखें बाहर की दुनिया देखती हैं, लेकिन तीसरी आँख (Third Eye) आपके भीतर का ब्रह्मांड दिखाती है। हमारे माथे के बीचों-बीच स्थित यह बिंदु केवल एक काल्पनिक स्थान नहीं, बल्कि अनंत संभावनाओं का द्वार है।
योग विज्ञान में इसे ‘आज्ञा चक्र’ कहा जाता है। जिसकी तीसरी आँख सक्रिय हो जाती है, उसकी दुनिया देखने की दृष्टि ही नहीं, बल्कि जीने का नजरिया भी पूरी तरह बदल जाता है।
आखिर क्या है थर्ड आई? (What is Third Eye)
सबसे पहले यह भ्रम दूर कर लें कि यह कोई मांस-पेशियों वाला भौतिक अंग है। यह एक सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र है।
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विकास और सक्रियता: यह धीरे-धीरे विकसित होती है। पहले यह ‘अनुभव’ के स्तर पर आती है और फिर पूरी तरह सक्रिय (Active) होती है।
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अदृश्य शक्ति: आपकी सक्रिय थर्ड आई को कोई आम इंसान नहीं देख सकता, लेकिन एक सिद्ध पुरुष या उच्च कोटि का साधक आपके चेहरे के तेज और ‘आभामंडल’ (Aura) को देखकर तुरंत पहचान सकता है कि आपकी तीसरी आँख जागृत है। आप भी बंद आँखों से अपनी थर्ड आई को देख सकते है. कुछ लोग शीशे के सामने खड़े होकर अपने माथे पर थर्ड आई को देखने की कौशिश करते है. ऐसा करने से कुछ दिखाई नहीं देगा.
कैसे समझें अपनी थर्ड आई की स्थिति? (How to Understand Third Eye)
थर्ड आई को समझना बहुत सरल है, बशर्ते आप धैर्य रखें।
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किसी भी आरामदायक आसन में बैठें अपने मन को शांत कर ले।
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धीरे से आँखें बंद करें और अपना ध्यान दोनों भौहों के बीच (Center of Eyebrows) केंद्रित करें।
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परिणाम का संकेत: यदि बंद आँखों से आपको सिर्फ ‘अंधेरा या काला रंग’ दिखाई दे रहा है, तो इसका अर्थ है कि अभी आपकी थर्ड आई सुप्त (Dormant) अवस्था में है। लेकिन यदि वहां प्रकाश, कोई खास रंग या हलचल महसूस हो रही है, तो समझ लीजिए कि विकास की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
थर्ड आई पर ध्यान लगाने की सही विधि (Right Technique to work on third eye)
थर्ड आई पर सीधा ध्यान लगाना कभी-कभी कठिन हो सकता है, इसलिए इसे चरणों में करना चाहिए:
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एकाग्रता (Concentration): सबसे पहले अपनी एकाग्रता को बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए ‘त्राटक’ (Tratak) सबसे उत्तम विधि है। दीये की लौ पर एकटक देखने से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता भी बढ़ने लगती है.
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ऊर्जा का संचय: थर्ड आई को जगाने के लिए अध्य्तामिक ऊर्जा चाहिए। योग निद्रा (Yoga Nidra) के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाएं ताकि ध्यान के समय आप उस शक्ति को सहन कर सकें।
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रंगों का खेल: जैसे-जैसे ध्यान गहरा होता है, आपको वहां रंग दिखाई देने लगेंगे। नीला, बैंगनी या सुनहरा – हर रंग आपके विकास की एक अलग कहानी कहता है।
विशेष टिप: सीधे थर्ड आई पर ध्यान लगाने से बेहतर है कि पहले त्राटक और योग निद्रा का अभ्यास करें। इससे आपको परिणाम बहुत जल्दी और सुरक्षित तरीके से मिलेंगे।
थर्ड आई सक्रिय होने के फायदे (Benefits of Third Eye Activation)
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अंतर्ज्ञान (Intuition): आपको भविष्य की घटनाओं का आभास होने लगता है।
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मानसिक शांति: जीवन के तनाव आपको विचलित नहीं करते।
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निर्णय लेने की क्षमता: आप भ्रम से दूर होकर स्पष्ट फैसले ले पाते हैं।
स्वाधिष्ठान चक्र और संबंध: क्या आपका ब्रेकअप या तलाक चक्रों की गड़बड़ी है?
हमारे जीवन में भावनाएं और आपसी संबंध सुख का आधार होते हैं। लेकिन जब यही संबंध टूटने की कगार पर आ जाएं, तो इसके पीछे केवल बाहरी कारण नहीं, बल्कि आपके शरीर का स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) भी जिम्मेदार हो सकता है।
स्वाधिष्ठान चक्र: 6 दैवीय शक्तियों का केंद्र
स्वाधिष्ठान चक्र केवल एक ऊर्जा केंद्र नहीं है, बल्कि यहाँ 6 दैवीय शक्तियां विराजमान हैं। हर शक्ति का अपना एक विशिष्ट महत्व और कार्य है। साधना शुरू करने से पहले यह तय करना अनिवार्य होता है कि हमें किस शक्ति से क्या परिणाम प्राप्त करना है।
खराब संबंधों का संकेत: रुष्ट स्वाधिष्ठान ऊर्जा
हमारे आपसी संबंधों, भावनाओं और कामुकता को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला कोई केंद्र है, तो वह स्वाधिष्ठान ही है।
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ब्रेकअप और तलाक: यदि आपके जीवन में बार-बार ब्रेकअप हो रहा है या तलाक जैसी नौबत आ गई है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपका स्वाधिष्ठान चक्र खराब हो गया है।
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इसका एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह भी है कि इस चक्र पर स्थित कोई एक दैवीय शक्ति आपसे पूरी तरह रुष्ट (नाराज) हो गई है।
ऐसी स्थिति में क्या करें?
जब जीवन के हर रास्ते बंद नजर आएं और आपसी दूरियां मिटने का नाम न लें, तब स्वाधिष्ठान चक्र साधना एकमात्र अचूक रास्ता बचता है। बहुत से लोग इस प्राचीन विद्या के माध्यम से अपने टूटे हुए रिश्तों को फिर से जोड़ने में सफल रहे हैं।
विशेष: आवश्यकता है तो बस एक सही गुरु की। हमारे संस्थान (Yoga My Life) में हमने अब तक अनगिनत लोगों को इस विशेष साधना के माध्यम से गंभीर वैवाहिक समस्याओं से बाहर निकाला है।
कैसे की जाती है स्वाधिष्ठान चक्र की साधना?
यह साधना अत्यंत सूक्ष्म है और इसे चरणों में पूरा किया जाता है:
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तत्व संतुलन: सबसे पहले इस चक्र को इसके मुख्य तत्व ‘जल’ (Water Element) के माध्यम से बैलेंस किया जाता है।
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पंखुड़ियों का जागरण: चक्र की कुल 6 पंखुड़ियों को एक-एक करके नई दिव्य ऊर्जा से ऊर्जावान बनाया जाता है।
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मानसिक स्थिति की निगरानी: चूंकि रिश्तों की समस्या से जूझ रहे साधक की मानसिक स्थिति पहले से ही नाजुक होती है, इसलिए गुरु साधक के मानसिक बदलावों पर कड़ी नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर ध्यान की विधि में बदलाव करते हैं।
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शक्ति साधना: अंत में, विशिष्ट दैवीय शक्ति की साधना की जाती है, जिससे समस्या वास्तव में जड़ से सुलझने लगती है।
परिणाम मिलने में कितना समय लगता है?
साधना के परिणाम साधक की श्रद्धा और स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करते हैं:
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आमतौर पर एक महीने में ही सकारात्मक बदलाव दिखने शुरू हो जाते हैं।
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कई बार स्थितियां 2 से 3 महीनों में पूरी तरह सुधर जाती हैं।
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जटिल मामलों में 4 से 6 महीने का समय लग सकता है।
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हमारे पास एक ऐसा भी केस आया था, जहाँ मात्र 20 दिनों में समस्या का समाधान हो गया था।
सावधान: यह साधना केवल और केवल गुरु के सानिध्य में ही संभव है। बिना विशेषज्ञ के इसे करना जोखिम भरा हो सकता है।
कुण्डलिनी और आपके विचार: जब साधना से आने लगें बुरे विचार, तो क्या करें?
अक्सर कहा जाता है कि “बिना जाने जीवन में कुछ भी करना सही परिणाम नहीं देता।” यह बात कुण्डलिनी साधना पर पूरी तरह सटीक बैठती है। अधूरी जानकारी के साथ की गई साधना इंसान को प्रगति की जगह पतन की ओर ले जा सकती है।
कुण्डलिनी एक ऐसी महाशक्ति है जो आपके मन के विचारों को पल-पल बदलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साधना के दौरान मन में अचानक बुरे विचार क्यों आने लगते हैं?
कुण्डलिनी कब और क्यों पैदा करती है बुरे विचार?
जैसे ही कुण्डलिनी शक्ति मूलाधार चक्र को छोड़कर ऊपर की ओर बढ़ती है, उसे एक सुगम रास्ते की जरूरत होती है। चूंकि यह रास्ता (सुषुम्ना नाड़ी) धीरे-धीरे बनता है, इसलिए ऊर्जा अक्सर अपना मार्ग भटक कर इड़ा (Ida) या पिंगला (Pingala) नाड़ी में प्रवाहित होने लगती है।
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नाड़ियों और तत्वों का खेल: यदि उस समय आपकी नाड़ी में कोई ऐसा तत्व सक्रिय है जो नकारात्मकता को उत्तेजित करता है, तो मन में बुरे विचारों की एक श्रृंखला शुरू हो जाती है।
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नियंत्रण की शक्ति: इसके विपरीत, यदि तत्व और नाड़ी का तालमेल सही है, तो यही कुण्डलिनी अत्यंत शुभ और सकारात्मक विचार पैदा करती है। इसका अर्थ यह है कि कुण्डलिनी के माध्यम से हम अपने विचारों को पूरी तरह नियंत्रित करना सीख सकते हैं।
नया चक्र, नए विचार और बदलता व्यक्तित्व
इंसान का मन हमेशा नई जगहों और नए विचारों से आनंदित होता है। कुण्डलिनी साधना में यह आनंद और भी बढ़ जाता है क्योंकि हर चक्र को पार करने पर साधक को नित नए अनुभव होते हैं।
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तेजस्वी व्यक्तित्व (Aura): यदि कुण्डलिनी को सही रास्ता मिलता रहे, तो साधक के चेहरे पर एक अद्भुत ओज (Tejas) और आभा (Aura) दिखने लगती है।
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मणिपुर चक्र (Manipur Chakra): यहाँ अगर रास्ता न मिले, तो व्यक्ति आक्रामक और क्रोधी हो जाता है। लेकिन सही दिशा मिलने पर यही ऊर्जा उसे इतना शक्तिशाली बनाती है कि वह दूसरों का मार्गदर्शक बन जाता है।
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अनाहत चक्र (Anahat Chakra): सही मार्ग मिलने पर यहाँ ‘परोपकार’ के विचार जन्म लेते हैं। रास्ता भटकने पर व्यक्ति दूसरों की मदद करने के बजाय उनसे अनुचित लाभ उठाने की सोचने लगता है।
डरावने अनुभव और एक्सपर्ट की सलाह
एक कुण्डलिनी एक्सपर्ट होने के नाते, मेरे पास ऐसे कई साधक आते हैं जो अपने ही विचारों से डरे हुए होते हैं। कई बार यह डर इतना गहरा होता है कि साधक का सामान्य जीवन जीना भी दूभर हो जाता है।
विशेष नोट: बिगड़े हुए केसेस को ठीक करने में बहुत समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। इसलिए, चाहे आप पुराने साधक हों या नए, कुण्डलिनी साधना को कभी भी बिना किसी एक्सपर्ट गाइड (Expert Guide) के शुरू न करें।
सही दिशा और सही गुरु का सानिध्य ही इस साधना को आनंदमय और सुरक्षित बना सकता है।
What Can the Root Chakra Give You?
The first of the seven chakras is the Muladhara Chakra (Root Chakra). While it is the first, it is also one of the most mysterious. Its true mystery lies in the profound powers hidden within it.
What is the Muladhara Chakra?
The structure of this chakra is often described as a four-petaled lotus. However, it is not just home to four powers; many other energies reside here. If you dream of a happy and fulfilled life—something we all desire—you must learn to harness the powers of the Muladhara Chakra.
Interestingly, while its energies can sometimes seem to pull against spiritual ascension (by keeping us grounded in the material world), it provides everything we need to survive and thrive in life.
What Can the Muladhara Chakra Give You?
The Muladhara Chakra is the foundation of our material existence. When balanced and empowered, it can grant:
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Abundant Wealth: Financial stability and flow.
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A Grand Home: The security of a physical shelter and property.
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Freedom from Fear: It eliminates deep-seated anxieties and insecurities.
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Healed Relationships: It stabilizes rocky relationships by providing emotional grounding.
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Social Prestige: Honor and respect within society.
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Career Success: Helping you secure the right job.
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Victory: It provides the stamina and influence to win—even in elections!
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Material Desires: Assisting in acquiring the things you long for.
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Marital Harmony: Helpful in overcoming obstacles to marriage.
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Debt Relief: Assistance in clearing financial burdens and loans.
Beyond these, the powers of the Muladhara Chakra can resolve many other life complications that stem from a lack of “grounding.”
How to Open the Muladhara Chakra?
Opening this chakra is not a DIY project; it requires a systematic approach:
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Understand through a Guru: First, you must understand the complexities of this chakra through the guidance of a Master.
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Harmonious Integration: Remember, the Muladhara should not be practiced in isolation. Before focusing solely on this chakra, the energy of all chakras must be interconnected.
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The Risk of Direct Practice: If you attempt to work on this chakra directly without preparation, your life situations may worsen instead of improving.
A Word of Caution: I have handled many cases where seekers faced issues because of incorrect Muladhara practice. While these “disturbed” cases can be corrected with time, it is always better to start the right way under supervision.
मूलाधार चक्र क्या-क्या दे सकता है?
7 चक्रों में से पहला चक्र है, मूलाधार चक्र. यह पहला चक्र जरूर है लेकिन बहुत अधिक रहस्यमयी है. इसका रहस्य है इसके अन्दर छिपी हुई कुछ शक्तियां.
इस चक्र की सरंचना 4 पंखुड़ियों वाला एक फूल जैसी है. लेकिन इस फूल पर केवल 4 शक्तियां नहीं अन्य शक्तियां भी विराजमान है.
अगर आप एक खुशनुमा जीवन की कल्पना करते है, (जो कि हर कोई चाहता है), तो आपको मूलाधार चक्र की शक्तियों को साधना चाहिए.
हालांकि इसकी शक्तियां काफी हद्द तक आध्यात्मिक उन्नति के विरुद्ध काम करती है लेकिन जीवन में वो हर चीज़ देती है, जो हमे जरूरत होती है.
क्या क्या दे सकता है मूलाधार चक्र
- प्रचुर मात्रा में धन.
- बड़ा मकान.
- सभी डरों को दूर करता है.
- बिगड़ी रिलेशनशिप ठीक करता है.
- समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है.
- नौकरी दिला सकता है.
- चुनाव जीता सकता है.
- मन चाही वस्तु दिलाता है.
- विवाह करवाने मे सहायक है.
- कर्जा समाप्त करवाने में सहायक.
इसके अतिरिक्त जीवन की ऐसी बहुत सी समस्यायें होती है जो मूलाधार चक्र की शक्तियां दूर कर सकती है.
मूलाधार चक्र को साधते कैसे है?
इसके लिए आपको इस चक्र को पहले अपने गुरु के माध्यम से समझना होगा. उसके बाद इस चक्र पर साधना करनी होती है. लेकिन याद रखिए कि इस चक्र की साधना सीधी नहीं की जाती. इस चक्र की साधना से पहले सभी चक्रों की ऊर्जा को आपस में जोड़ा जाता है.
अगर सीधे इस चक्र पर काम किया जाए तो स्थितियां सुधरने की बजाय बिगड़ने लगती है. मेरे पास मूलाधार चक्र के अब तक जितने भी केस आए है वो लगभग इसी तरह के आये है. हालांकि इन बिगड़े हुए केसेस को ठीक करने के लिए कुछ समय अवश्य लग जाता है लेकिन ठीक हो जाते है.
3 Major Fears of Kundalini Sadhana: Is It Actually Dangerous?
The term ‘Kundalini Awakening’ often brings a mix of curiosity and fear. Misinformation on the internet has painted a scary picture of this spiritual process. Many seekers hesitate, fearing for their mental or physical health.
Today, let’s debunk the 3 primary fears associated with Kundalini Sadhana.
1. Fear of Losing Mental Balance
The biggest concern is that the rising energy might cause insanity or a mental breakdown.
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The Reality: Kundalini is not an external force; it is your own higher consciousness. Mental instability only occurs when a seeker attempts intense practices without proper preparation (Yamas and Niyamas). With a solid foundation, this energy brings ‘Super-Consciousness,’ not madness.
2. Fear of Physical Pain or Illness
Seekers often worry about intense body heat, nerve pain, or mysterious diseases.
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The Reality: Sensations like heat or tingling are part of the ‘Purification’ process (Nadi Shuddhi). If practiced under guidance with a proper diet, the body gradually adapts to the higher vibration, making it perfectly safe.
3. Fear of Social Isolation
Many fear they will lose interest in their family, job, or social life and become a recluse.
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The Reality: Kundalini Sadhana doesn’t detach you from the world; it helps you understand it better. It makes you ‘Sthitapragya’ (Equanimous), allowing you to perform your worldly duties with more love and efficiency.
Tips for a Safe Journey:
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Seek a Mentor: Never dive deep without a guide.
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Patience: It is an evolution, not a magic trick.
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Prepare the Body: Focus on Hatha Yoga and Breathwork first.