Author: Acharya Harish
Kundalini Awakening and Consciousness
Consciousness
Consciousness is the power which we generally not have. Most of the human being born without the power of consciousness. But it doesn’t mean they don’t get in the future. With the help of this great power life become so easy. You know the what you are.
Kundalini Awakening
Kundalini is the dormant force which is lying in sleeping mode in shushmna nadi and by different means when we force this divine energy to rise, it is called as Kundalini Awakening.
How to develop the consciousness power
Consciousness is directly related with the kundalini shakti. As you become conscious, you become more aware of the life.
Kundalini shakti not only increase the spiritual awareness but the general awareness also.
As kundalini starts rising, consciousness starts developing but at this point, no one directly become aware , awareness gradually increases with rising of kunadlini. sometimes kundalini rises partially and this situation reduces the level of awareness.
You become more aware and Powerful
Now you are not alone. You have now power of consciousness with you. This power of consciousness gives you leadership quality. This creates a high level of confidence within you. This is because your manipur chakra is now developed.
How Kundalini Awakening starts
Kundalini awakening starts at root chakra in Sushumna Nadi. Kundalini remains dormant in every human being at this place. Here 3 main nadis are originating. These are:-
- Pingla or The Sun Nadi
- Ida or The Moon Nadi
- Sushmna or Neutral Nadi
What is a Nadi?
A nadi is a subtle path where prana energy flows. Prana is a subtle invisible divine energy behind the life. Normally Prana flows through the 2 nadis, pingla and ida. But when this prana force to flow in Sushmna nadi, it is said that kundalini awakening starts.
Besides the power of consciousness and awareness kundalini gives a couple of other divine powers too. These powers show you lights in different paths of the life.
भगवान ने हमें क्यों बनाया? – Why God Made Us?
भगवान ने हमें क्यों बनाया? – Why God Made Us?
शाश्त्र कहते है कि – भगवान ने हमे इस धरती पर मनुष्य रूप में इसलिए जन्म दिया ताकि हम मोक्ष प्राप्ति करे. अपने कर्म से खुद का सुन्दर भविष्य बनाये.
एक और बात; शाश्त्रों में यह भी आती है कि भगवान बोरियत महसूस कर रहे थे और उन्होंने सोचा कि मैं एक से अनेक हो जाऊ और फिर उनके उस संकल्प से ही एक से अनेकता होने लगी.
इसका मतलब हम भगवान को इंसान जैसा सोच रहे है. यानि इंसान का एक ऐसा रूप जो हम इंसानों से ज्यादा पावरफुल हो. क्यूंकि बोरियत किसी का माइंड महसूस कर सकता है लेकिन चेतना नहीं. क्यूंकि जैसे ही हम चेतन होते है तो हमारा माइंड गायब हो जाता है.
अब अगर अभी एक मिनट के लिए चेतन होते है तो आप पायंगे कि आपकी सोचे आपके विचार रुक गए है या गायब हो गए है.
अब दूसरी बात कि मोक्ष के लिए भेजा, तो यह आईडिया भी हमारे बेसिक प्रश्न का उतर नहीं देता. मोक्ष का मतलब कि हमें आजाद नहीं है. आजाद नहीं है तो फिर किसके गुलाम है, क्या भगवान के या फिर किसी और के. यह प्रश्न और भी उलझा देता है.
बहुत सोचने पर भी हमारा मन इस प्रश्न का हल नहीं ख़ोज पाता . क्यूंकि इस प्रश्न का उत्तर हमारे मन के अंदर है ही नहीं. क्योंकि हमारे मन की अपनी लिमिट्स है.
अब अगर मन के पास इस प्रश्न का उतर नहीं है तो फिर किसके पास है?
इस प्रश्न का उतर पाने के लिए हमें अध्यात्म को समझना होगा, श्रीमद्भागवद्गीता, श्रीमद्भागवद्गीता में श्री कृष्ण ने अपने स्वरुप को अध्यात्म बताया है. ऐसा श्रीमद्भागवद्गीता के आठवें अध्याय में श्री कृष्ण द्वारा कहा गया है. मज़े की बात यह है कि भगवान श्री कृष्ण श्रीमद्भागवद्गीता में भगवान को व्यक्ति के रूप में मानने वालों को मुर्ख बताते है लेकिन फिर भी हम इस बात के सही मतलब को अनुभव में नहीं ला पाते. इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता बस एक प्रश्न आपके दिमाग में छोड़ना चाहता हूँ.
अब फिर से अध्यात्म पर आता हूँ. अध्यात्म का मतलब है, खुद को जानना. मैं कौन हूँ इस बात को जानना. जब कोई जीव खुद को जान जाता है तो उसे इस प्रश्न का उत्तर भी खुद से मिल जाता है कि भगवान में उसे क्यों बनाया था.

लेकिन थोडा और इस प्रश्न पर विचार करे तो बहुत सारी बातें दिमाग में आती है. क्यूंकि भगवान का बनाया हुआ कुछ भी बिना मतलब के नहीं है. सब कुछ वैज्ञानिक है. इस दुनियां की हर चीज वैज्ञानिक है. इसलिए जो भी शक्ति इस संसार के पीछे है, जिसे हम भगवान कह सकते है – उस शक्ति का हमें लेकर कोई न कोई मकसद तो है ही. हम जी कर कुछ न कुछ तो ऐसा कर रहे है जो कि बहुत जरुरी है उस शक्ति के लिए. बाकि सब बातें तो हमें इस दुनियां में टिकाने के लिए है, जैसे हमारी इच्छाएं, हमारे रिश्ते नाते, हमारी सांसारिक जरूरते, सब कुछ.
कुछ न कुछ तो ऐसा है जो हमें करते है और उस से किसी न किसी को कोई न कोई फायदा तो हो रहा है. बस इसी प्रश्न को बार बार सोचना होगा. क्यूँ हूँ मैं? क्या कर रहा हूँ मैं? अगर भगवान मुझे पैदा कर सकते है तो क्या मोक्ष नहीं दिला सकते? क्यूंकि हमें चलाने वाली शक्ति हमारे विचारों के माध्यम से हमसे जो कुछ भी करवाना चाह रही है वो हम करते चले जा रहे है. यदि हम वो न करे तो हमारा जीवन नीरस होने लगता है और हम अकर्मण्यता के शिकार होकर डिप्रेशन का शिकार हो जाते है. हमारा माइंड यानि हमारा मन एक बेहद ही जटिल और शक्तिशाली तंत्र है. जो है तो सही; पर हमें दिखाई नहीं देता. यही तंत्र यानि हमारा माइंड ही हमें एक चक्र के उलझाये रखता है. जिसे हम जीवन और मृत्यु कह सकते है.
शायद इसी चक्र को तोड़ देना ही मोक्ष है. क्यूंकि हमारा जीना बिल्कुल भी हमारे बस में नहीं है. इंसान ने इस धरती पर आने के बाद कितनी भी तरक्की कर ली है लेकिन वो मौत की गुत्थी को नहीं सुलझा सका है.
हमें इस प्रश्न का उत्तर साइंटिफिक तरीके से खोजना होगा तभी हम खुद के होने को समझ पाएंगे और तभी हमारे दुःख भी कम हो जायेंगे. हमारा जीवन भी आसान हो जायेगा.
मैं जानता हूँ कि मैंने अपने टॉपिक – “भगवान ने हमें क्यूँ बनाया होगा” – का जवाब नहीं दिया. शाश्त्रों में से कही न कही शब्दों के माध्यम से इसका जवाब मैं भी दे सकता था. लेकिन मैं वैसा जवाब देना नहीं चाहता और न ही वैसा सोचन चाहता हूँ. बस मैं तो मौलिक रूप से सोचने की बात करता हूँ.
What is Healing? – हीलिंग क्या होती है?
Healing
हीलिंग एक व्यापक शब्द है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर रोगों, तनाव, दुःख, बीमारियों और अस्तित्व के विभिन्न प्रकार के संकटों को ठीक करने की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसका मुख्य उद्देश्य संतुलन, पुनर्स्थापना और पुनर्योग को स्थापित करके पूर्ण स्वास्थ्य, सुख और आत्मिक समृद्धि को प्राप्त करना होता है।
हीलिंग में विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि चिकित्सा, ध्यान, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, योग, प्राणायाम, मेडिटेशन, रेकी, आरोमा थेरेपी, प्राणिक चिकित्सा, क्रिस्टल थेरेपी, आवाज थेरेपी आदि। ये तकनीकें शारीर, मन और आत्मा के संतुलन को बढ़ाने, प्राकृतिक गुणों को जागृत करने, ऊर्जा को संचालित करने और रोगों या संकटों को दूर करने में मदद करती हैं।
हीलिंग की व्यापकता और विविधता के कारण, यह विभिन्न धार्मिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हो सकती है और उनके तत्वों और सिद्धांतों पर आधारित हो सकती है। हीलिंग के माध्यम से, व्यक्ति अपने शरीर, मन और आत्मा की ऊर्जा को संतुलित करता है और स्वस्थ और समृद्ध जीवन की प्राप्ति के लिए आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और उच्चतम स्तर के अवस्थान को प्राप्त कर सकता है।
कई केसेस के हीलिंग कमाल के परिणाम देती है। लेकिन इसके लिए साधक के पास एकाग्रता नाम की शक्ति होनी चाहिए। बिना एकाग्रता के हीलिंग काम ही नहीं करती। हीलिंग करने से पहले शरीर में प्राणायाम की मदद से प्राण उर्जा को भी बढ़ाया जाता है.
हीलिंग विभिन्न प्रकारों में हो सकती है और इनमें से कुछ प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
शारीरिक हीलिंग: शारीरिक हीलिंग शारीरिक रोगों और आवारण को ठीक करने के लिए की जाती है। इसमें चिकित्सा, योग, प्राणायाम, आरोमा थेरेपी, रेकी, मांगनेटिक थेरेपी आदि शामिल हो सकते हैं।
मानसिक हीलिंग: मानसिक हीलिंग मनोवैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके मानसिक और भावनात्मक संतुलन को सुधारने का प्रयास करती है। यह ध्यान, ध्यानाभ्यास, आवाज थेरेपी, स्वाध्याय, आत्मविश्वास निर्माण, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, पॉजिटिव अवतरण आदि के माध्यम से हो सकती है।
ऊर्जा चिकित्सा: ऊर्जा चिकित्सा अवसाद, तनाव, शारीरिक और मानसिक रोगों को ठीक करने के लिए ऊर्जा के प्रवाह का उपयोग करती है। इसमें रेकी, प्राणिक चिकित्सा, क्वांटम हीलिंग, एनर्जी बैलेंसिंग आदि शामिल हो सकते हैं।
स्पिरिचुअल हीलिंग: स्पिरिचुअल हीलिंग आत्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को सुधारने का प्रयास करती है। इसमें प्रार्थना, मेडिटेशन, रेकी, क्रिस्टल थेरेपी, एंजेलिक हीलिंग, प्राणिक चिकित्सा आदि शामिल हो सकते हैं।
संगठित हीलिंग: संगठित हीलिंग अस्पष्ट शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक समस्याओं को ठीक करने के लिए संगठित तकनीकों का उपयोग करती है। इसमें प्रोफेशनल काउंसलिंग, परिवार चिकित्सा, विवाह और संबंध संशोधन, ग्रुप थेरेपी आदि शामिल हो सकते हैं।
ब्रेन हीलिंग – यह एक बिल्कुल ही नया कांसेप्ट है. इसमें ब्रेन में विभिन्न भागों पर हीलिंग की जाती है। सबसे पहले ब्रेन के भागो को समझा जाता है। फिर जरुरत के हिसाब से प्रकाशीय हीलिंग का प्रयोग किया जाता है।
यह सिर्फ कुछ प्रमुख हीलिंग प्रकार हैं और इसके अलावा भी अनेक तरीके हो सकते हैं जो विभिन्न धार्मिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं से संबंधित हो सकते हैं।
Gayatri Mantra Healing
गायत्री मन्त्र हीलिंग से क्या होता है?
एक है गायत्री मंत्र जिसकी मदद से हम खुद की हीलिंग कर सकते हैं। इस मंत्र के द्वारा हम अपने सूर्य को पुष्ट कर सकते हैं इसके अलावा हम अपने अग्नि तत्व को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ साथ हम अपने मणिपुर चक्र को सही कर सकते हैं। कई बार जीवन में ऐसा होता है कि सब कुछ होते हुए भी हमारे अंदर आत्मविश्वास नहीं होता। आत्मविश्वास के लिए हम बहुत सारी मोटिवेशनल किताबें पढ़ते हैं, बहुत सारे मोटिवेशनल लेक्चर सुनते हैं, और खुद को बहुत सारी एफिरमेशंस देते हैं, लेकिन फिर भी हमारा आत्म विश्वास नहीं बढ़ता। ऐसे में समझ नहीं आता कि क्या किया जाए? कई बार तो आत्मविश्वास इतना कम होता है कि अपने घर में ही अपने घर के सदस्यों से बात करने में भी डर लगता है। किसी का भी सामना करने में डर लगता है। स्टेज पर बोलने में डर लगता है। टीचर के सामने बोलने में डर लगता है। बिजनेस मीटिंग के लिए जा रहे हैं उसका सामना करने में डर लगता है। अपने से छोटे इंसान के साथ बात करने में भी डर लगता है, और बड़े इंसान के साथ बात करने में तो डर लगता ही है।
क्या आत्मविश्वास पाने के लिए कोई मेडिसिन है?
इसके लिए कोई मेडिसिन नहीं है कि यह समस्या ठीक हो जाए।
यह होता इसलिए है क्योंकि मणिपुर चक्र और अग्नि तत्व कमजोर होता है। इसको ठीक करने का तरीका एक ही है अग्नि तत्व और मणिपुर चक्र को ठीक कर लिया जाए।
अब बात यह आती है कि अग्नि तत्व या मणिपुर चक्र ठीक होंगे कैसे? इसके लिए हमें ध्यान सीखना होगा तत्व साधना सीखनी होगी, चक्र साधना सीखनी होगी।
तत्व साधना, चक्र साधना सीख कर ही हम अपने अग्नि तत्व ठीक कर सकते हैं। चक्र साधना और तत्व साधना सीखने से पहले ध्यान के द्वारा हमें अपनी एकाग्रता को बढ़ाना होगा क्योंकि बिना एकाग्रता से तत्व साधना या चक्र साधना नहीं की जा सकती है।
Healing Why & How – हीलिंग क्यों और कैसे
भारत में हीलिंग का एक बहुत बड़ा इतिहास रहा है प्राचीन ऋषि अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते थे या उन लोगों के पास जो आमजन आते थे दुख लेकर उनको आशीर्वाद दिया करते थे।
वह एक प्रकार की हीलिंग ही थी। हालांकि हीलिंग नाम का शब्द हमारे ग्रंथों विद्यमान नहीं है, लेकिन हिलिंग का जो सोर्स है वह भारतीय ग्रंथ ही हैं। हीलिंग एक तरह की पद्धति है जिसमें हम प्राण ऊर्जा की मदद से प्राण शरीर को ठीक करके स्थूल शरीर में पैदा हुई बीमारियों को ठीक कर लेते हैं । भारतीय परंपरा के अनुसार हीलिंग कई प्रकार की होती है। खास तौर पर पांच तत्वों से हम हीलिंग करते हैं। यह पांच तत्व है, पृथ्वी जल, अग्नि, वायु और आकाश। इन पांच तत्वों से ही हमारा शरीर बना हुआ है। इसलिए इन पांच तत्वों की हीलिंग करके हम अपने शरीर की हर समस्या को दूर कर सकते हैं। उसके बाद कॉस्मिक लाइट से हील करते हैं मंत्रों से हीलिंग करते हैं ।अलग-अलग प्रकार के मंत्र अलग-अलग प्रकार की हीलिंग में काम आती है। जैसे अगर किसी का सूर्य कमजोर हो गया हो यानी अग्नि तत्व कमजोर हो गया हो तो उसके लिए हम गायत्री मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि गायत्री मंत्र जो है वह सूर्य से संबंधित है और वह हमारे शरीर के अंदर अग्नि तत्व या फिर मणिपुर चक्र को बल देता है।
जब जीवन के अंदर कोई रास्ता ना मिल रहा हो तब पांवमान मंत्र की लिखी जाती है पवमान मंत्र जो है इस प्रकार से है
असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर्मा अमृतम्
इस मंत्र की लगातार 40 दिन तक रोजाना 108 बार जपने से यानी एक माला जपने से आपको खुद ब खुद रास्ता देखने लगता है मंत्र हीलिंग है जो निश्चित तौर पर काम करती है।
भारतीय ग्रंथों के अनुसार हम ग्रहों की मदद से हीलिंग कर सकते हैं। हमारे ग्रह और हमारे नक्षत्र जब हमारे अनुसार काम नहीं करते तब हमें उनकी हीलिंग करनी पड़ती है। इन ग्रहों के और इन नक्षत्रों के अपने मंत्र हैं और इन ग्रहों के और नक्षत्रों के अपने देवता भी हैं। उन देवताओं को ध्यान में रखते हुए और उनके मंत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष विधि के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है, या यूं कह सकते हैं कि हीलिंग की जाती है। इस प्रकार से हम यह समझ सकते हैं कि हिलिंग का हम प्रयोग विभिन्न तरीकों से और विभिन्न व्यक्तियों के लिए, विभिन्न स्थितियों के लिए भी कर सकते हैं हीलिंग का प्रयोग हम आपसी संबंधों को सुधारने के लिए कर सकते हैं, बीमारी को ठीक करने के लिए कर सकते हैं , किसी जगह पर नकारात्मक उर्जा हो उस उर्जा को ठीक करने के लिए ही हीलिंग का प्रयोग कर सकते हैं इस प्रकार से फीलिंग के अनूठे प्रयोग हैं और उसके अनूठे रिजल्ट भी हैं, लेकिन हीलिंग करने से पहले उसको सीखना बहुत जरूरी है क्योंकि बगैर सीखे अगर कोई हीलिंग करता है तो उसके रिजल्ट नहीं मिलते हैं क्योंकि इसके भी अपने नियम हैं कायदे हैं तरीके हैं।
Personal Mantra – अद्वितीय मन्त्र या व्यक्तिगत मंत्र
अद्वितीय या व्यक्तिगत

अद्वितीय या व्यक्तिगत
हमारा शरीर 5 तत्वों से बना हुआ है. यह 5 तत्व है पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश. यह पांचो तत्व पहले पांच चक्रों से जुड़े हुए है. हमारे चक्र हमारे सूक्ष्म शरीर या प्राण शरीर का हिस्सा है. सभी चक्र हमारी रीढ़ की हड्डी के माध्यम से हमारे ब्रेन से जुड़े हुए है. ब्रेन और मन दोनों अलग है. मन एक ऐसी शक्ति है जिसकी मदद से हम इस संसार को समझ सकते है.
हर व्यक्ति 5 तत्वों के और विभिन्न चक्रों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन के साथ इस दुनियां में आता है. कई लोग अच्छे कॉम्बिनेशन के साथ आते है और कई लोगों का यह कॉम्बिनेशन अच्छा नहीं भी होता है.
एक सभी तत्वों और चक्रों के कॉम्बिनेशन को देखते हुए हमने कई सालों तक एक रिसर्च की जिसमे हमने कुछ बीज मंत्रो का प्रयोग किया और एक व्यक्ति के लिए एक विशेष मन्त्र का निर्माण किया. वो नवनिर्मित मन्त्र हमने जिस जिस के लिए बनाया उसे प्रयोग करने का तरीका भी बताया.
जिस जिस ने इस मन्त्र का प्रयोग किया उसे अद्धभुत परिणाम मिले.क्यूंकि यह मन्त्र उसी व्यक्ति के जन्म के नियमों के आधार पर होता है. इस मन्त्र को हमने नाम दिया है अद्वितीय मन्त्र या व्यक्तिगत मंत्र.
मंत्र को कैसे जपा जाता है?
जैसे अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र हर किसी का एक नहीं होता वैसे ही इसके जपने का तरीका भी हर किसी के लिए के जैसा नहीं होता. अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र प्राप्त होने के बाद इसको जपने का तरीका भी निश्चित किया जाता है. वो तरीका साधक को बताया जाता है.
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र को जपने से क्या लाभ मिलता है?
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र क्यूंकि व्यक्तिगत रूप से आपके लिए बनाया जाता है इसलिए इसका लाभ सीधे तौर पर आपको मिलता है. अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र आपके चक्रों और आपके तत्वों को सही करता है. चक्रों को उर्जा प्रदान करता है जिस से आपकी भौतिक, आर्थिक, परिवारिक, सामाजिक व अध्यात्मिक उन्नति होने लगती है. क्यूंकि इस सभी के पीछे चक्रों और तत्वों का अपने मूल रूप से पिछड़ जाना ही होता है.
क्या अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र के लिए सही जन्म समय और तिथि आवश्यक है ?
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र दो प्रकार से प्राप्त किया जाता है.
पहला – जन्म समय के आधार पर
दूसरा – जन्म समय, तिथि और स्थान अगर सही पता नहीं हो तो इसके लिए दूसरा तरीका प्रश्नावली है. कुछ प्रश्न आपके जीवन से सम्बंधित आपसे पूछे जाते है और उनके आधार पर अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र निकाला जाता है.
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र को कितने समय करना होता है?
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र पर प्रतिदिन लगभग 20 से 45 मिनट्स तक जप करना होता है और जब आपको लाभ मिल जाता है तो आप इस समय को कम कर सकते है.
किन लोगों को अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र की जरुरत होती है?
कोई भी जन जब किसी विशेष आर्थिक, परिवारिक, शारीरिक व मानसिक समस्या से गुजर रहा हो उसे अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र का प्रयोग करना चाहिए. ताकि उसे लाभ मिल सके.
अद्वितीय या व्यक्तिगत मंत्र Yoga My Life का अनुसन्धान है. इसके लिए आपको सबसे पहले हमसे संपर्क करना होगा. निम्न प्रकार से आप हमसे सम्पर्क कर सकते है:-
98158 35440 (WhatsApp)
98158 35440 (Telegram)
Acharya Harish
Meditation and Noise Pollution
ध्यान से बढ़ाये स्मरण शक्ति
आज का खान पान ऐसा हो गया है कि कुछ याद ही नहीं रहता और ऊपर से यह Noise Pollution; इस शोरगुल ने तो जैसे सब कुछ ही भुला दिया है. सच ही है कि जैसे-जैसे इंसान तरक्की करता जा रहा है वैसे-वैसे हमारे वजूद को लेकर भी समस्याएँ बढती चली जा रही है.
स्मरण शक्ति तो बस जैसे दूर ही होती जा रही हो. कई बार तो ऐसा होता है कुछ सेकंड्स पहले किया हुआ काम ही भूल जाता है. दूध को गर्म करने रखा और यह भी सोचा कि इस बार याद रखेंगे लेकिन फिर भी भूल गए और नतीजा तो आप जानते ही है.
ऐसा ही न जाने कितने रोज़मर्रा के काम जो पलभर में याद आते है और पलभर में ही दिमाग से गायब हो जाते है.
शोरगुल
शोरगुल फ़ैलाने वालों को भी यह बात सोचनी चाहिए. आखिर यह समस्या तो हम सब की समस्या ही तो है. यह सडको पर बिना ही बात के हॉर्न बजाने वाले तो सच में कमाल के लोग है. कुछ सोचते ही नहीं कि उनके इस Noise Pollution से आखिर किस को फायदा हो रहा है. हॉर्न गाड़ी में लगा है इसका मतलब यह तो नहीं कि बजाते रहो.
खैर हम दूसरों को नहीं बदल सकते यह एक कडवी सच्चाई है. लेकिन हम खुद को बदल सकते है यह एक अनूठा सच भी है. कमज़ोर पड़ती स्मरण शक्ति का कुछ न कुछ तो करना ही होगा. नहीं तो जीवन कठिन होता चला जायेगा.
इसके लिए ध्यान का सहारा अगर लिया जाये तो बात बन सकती है. क्यूंकि दुनियां भर की रिसर्च में यह सिद्ध हुआ है कि ध्यान शान्ति के साथ साथ स्मरण शक्ति को बढ़ाता है. कहते है कि ध्यान अंदर की दुनियां में लेकर जाता है जहाँ अथाह शांति का वास है.
बाहरी शोरगुल
बाहरी शोरगुल तो बाहरी दुनियां की ओर खींच कर चेतना को जैसे हर रहा है. ऐसे में ध्यान हमें अंदर की ओर ले जाता है और ऐसे में हमारे मन को और दिमाग को आराम करने का मौका मिलता है.
ध्यान सच में बेहद खुबसूरत कला है. पता नहीं क्यों लोग ध्यान को धर्म से जोड़ने लगते है. जबकि यह तकनीक है खुद को खूबसूरत बनाने की. मन अगर खुबसूरत होगा तो उसका असर चेहरे पर तो आएगा ही.
दिमाग निश्चित तौर पर बढ़ता ही है. क्यूंकि ध्यान से हम अंतर्मुखी होते है. लेकिन ध्यान का परिणाम तभी अच्छा आता है जब इसे नियमित रूप से किया जाये.
ध्यान करना चाहिए और सबसे जरुरी ध्यान करने से पहले ध्यान को सीखना चाहिए
Acharya Harish
पहली बार ध्यान – First Time Meditation
जब भी हम पहली बार ध्यान करना शुरू करते है तो हम इसके लिए सबसे पहले गूगल या फिर YouTube पर सर्च करते है. यह एक तरह से है भी सही. लेकिन इन्टरनेट पर हमें कई तरह की ध्यान की विधियाँ मिलती है और कई तरह के करवाने वाले भी मिलते है. ऐसे में हम कंफ्यूज हो जाते है कि हमें करे तो क्या करे. अब समझने वाली बात यह है कि ध्यान करने से पहले ध्यान के बारे में समझना जरुरी है. क्यूंकि करना क्या है यह समझ में आ गया तो आगे का रास्ता आसान हो जाता है.
ध्यान क्या है यह समझना बेहद जरुरी है?
वास्तव में हम जो भी सीखते है वो 5 इन्द्रियों के माध्यम से सीखते है. हमारा मन 5 इन्द्रियों के माध्यम से ही सीखने के लिए ही बना है. लेकिन ध्यान इन्द्रियों से परे की बात है. ध्यान को समझने के लिए भी हमें 5 इन्द्रियों से बाहर निकलना होगा, जिसकी हमें आदत ही नहीं है. क्यूंकि जब तक हम सोच रहे है तब तक हम ध्यान नहीं कर रहे है. इस बात को हमें समझना होगा.
प्रत्याहार
योग की भाषा में इन्द्रियों से बाहर निकलने को प्रत्याहार कहा गया है. जब प्रत्याहार होता है इसका हमें अनुभव ही नहीं होता. वास्तव में हम प्रत्याहार के बारे में सोच ही नहीं सकते क्यूंकि सोचा तो वो प्रत्याहार होगा ही नहीं. इसलिए इसे एक अनुभव मानते हुए हमें आगे बढ़ना होता है. सीधे तौर पर यह समझ ले कि कुछ भी सोचा तो प्रत्याहार नहीं होगा.
प्रत्याहार से आगे जाना होगा
प्रत्याहार से आगे निकलना होगा और फिर एक शब्द आता है धारणा. धारणा का सीधा अर्थ है एक ही पॉइंट पर अपने मन को लम्बे समय तक टिकाये रखना. जोकि इतना आसान नहीं है. जब हम ऐसा करने में सफल हो जाते है तो हम ध्यान की दहलीज़ पर पहुँचते है. उसके बाद ध्यान अपने आप ही आ जाता है.
नियमित गाइडेंस जरुरी
अब इन सब बातों को समझते हुए हमें ध्यान की विधि को और तरीके नो निर्धारित करना होता है. यह कार्य गुरु के द्वारा ही होना चाहिए और उसके बाद हमें आगे बढ़ने कल इए नियमित गाइडेंस की जरुरत होती है. अगर नियमित गाइडेंस नहीं मिलेगी तो आगे बढ़ ही नहीं पाएंगे.
Story Root Chakra – मूलाधार चक्र
मुख्यरूप से 7 चक्र
मानव शरीर में मुख्यरूप से कुल 7 चक्र होते है. मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार. हर चक्र की अपनी एक ख़ासियत है. यह मानव उर्जा के ऐसे स्थान है जहाँ विभिन्न कार्यो के लिए उर्जा एकत्रित होती है.
यानि यह 7 चक्र एक तरह से घुमती हुई उर्जा के 7 पुंज है. यहाँ उर्जा कम और अधिक होती रहती है. इसके कम या अधिक होने से हमारे जीवन पर अलग अलग प्रकार से प्रभाव है.
पहला चक्र मूलाधार चक्र
इस श्रंखला का पहला चक्र मूलाधार चक्र है. इसका यंत्र 4 पंखुड़ियों वाला एक लाल रंग का फूल है जो ऊपर की ओर खिला हुआ है. इन 4 पंखुड़ियों पर 4 अक्षर खुदे हुए है. पहला अक्षर स है दूसरा व् तीसरा श और चोथा ष है.
यह हमारी गुदा और जेनिटल organ के बीच स्थित है.
मूलाधार चक्र का एक खास फ्रीक्वेंसी पर घूम रहा है इसलिए यह एक खास तरह की आवाज़ कर रहा है. इसके इस तरह से चक्र के रूप में घुमने से जो आवाज़ निकल रही है वो आवाज़ लं जैसी है इसलिए इसका मन्त्र लं है.
मूलाधार चक्र का तत्व पृथ्वी
हर चक्र एक तत्व से सम्बंधित होता है ऐसे ही मूलाधार चक्र के साथ भी है. मूलाधार चक्र का तत्व पृथ्वी है. इसके तत्व पृथ्वी कर यंत्र पीले रंग का एक वर्ग है. मूलाधार चक्र का रंग लाल है और इसके तत्व पृथ्वी का पीला.
इसके बढ़ने और घटने की वजह से हमारे जीवन में बहुत सारे बदलाव होने लगते है. यह हमारी मूलभूत सुविधाओं से सम्बन्ध रखता है.

जब इस चक्र पर उर्जा बढ़ने लगती है तो मूलभूत सुविधाएँ तो बढ़ जाती है लेकिन जीवन में सम्बन्ध बिगड़ने लगते है. जीवन में सब कुछ होते हुए भी कुछ भी अच्छा नहीं लगता. जीवन में तनाव बढ़ जाते है और तनाव अधिक बढ़ जाने से कई तरह की बीमारियाँ शरीर में पैदा हो जाती है. रात को नींद नहीं आती.
जब यह तत्व घट जाता है तो उर्जा का बहाव यहाँ घट जाता है. ऐसा होने पर मूलभूत सुविधाएँ जीवन में घटनी शुरू हो जाती है. जीवन में हर जगह अभाव ही अभाव दिखाई देता है. जीवन को लक्ष्य नहीं मिल पाता है.
इस चक्र का सही होना एक संतुलीय जीवन के लिए बेहद जरुरी है.
इस चक्रों को और इसके तत्व को सही करने के लिए चक्र साधना और तत्व साधना का हम सहारा ले सकते है.
आवाजों की भाषा – Language of Sounds
आवाजों की भाषा
मुझ से जो चाहिए वो दर्स-ए-बसीरत लीजे
मैं ख़ुद आवाज़ हूँ मेरी कोई आवाज़ नहीं (असग़र गोंडवी)
हम आवाजो का प्रयोग करते है अपनीबातों को समझाने के लिए. हम हर आवाज़ को एक मतलब देते है. लेकिनआवाजों की अपनी एक भाषा भी होती है जिस से हम आमतौर पर अनभिज्ञ रहते है. मज़े की बात आपको बताता हूँ कि जो आप और हमने विभिन्न साउंड्स को अर्थ दे रखे है वो उनके वास्तविक अर्थ नहीं है. हरसाउंड कुछ न कुछ इफ़ेक्ट पैदा करती है हमारे जेहन में.
यादें तन्हाई से बातें करती हैं
सन्नाटा आवाज़ बदलता रहता है– (ज़का सिद्दीक़ी)
इस बात को हम संगीत से समझ सकते है. भारत में बड़े बड़े संगीत घराने है. संगीत का चलन भारत में राजा महाराजाओं के काल से चला आ रहा है. कुछ रागों के बारे में बताता हूँ.
मल्हार राग/ मेघ मल्हार, हिंदुस्तानी व कर्नाटिक संगीत में पाया जाता है। मल्हार का मतलब बारिश या वर्षा है और माना जाता है कि मल्हार राग के गानों को गाने से वर्षा होता है। मल्हार राग को कर्नाटिक शैली में मधायामावती बुलाया जाता है। तानसेन और मीरा मल्हार राग में गाने गाने के लिए मशहूर थे। माना जाता है के तानसेन के ‘मियाँ के मल्हार’ गाने से सुखा ग्रस्त प्रदेश में भी बारिश होती थी.
देखा आपने कैसे साउंड के एक खास तरीके ने इस प्रकृति को वर्षा करने को मजबूर कर दिया. एक तरह से इनपुट है साउंड्स. अगर यह विद्या समझ आ जाये तो जीवन में कुछ भी किया जा सकता है.
बादशाह अकबर की जिद पर तानसेन ने दीपक राग गया तो न सिर्फ दीपक अपने आप जल उठे, बल्कि आसपास का माहौल भी तपने लगा। इस राग के असर से खुद तानसेन का शरीर भी भयानक रूप से गर्म होने लगा। उनकी बेटियों ने राग मेघ मल्हार गाकर उस वक्त उनके जीवन की रक्षा की.
इतना कुछ छिपा है आवाजोंमें. बड़े ही कमाल की बाते है यह. मैं बता रहा था कि हर बोले गए शब्द की अपनी एक भाषा है. पतंजलि योग सूत्र में भी इसके बारे में बताया गया है. पतंजलि योग सूत्र में तो कमाल की बात कही गयी है. एक शब्द आता है पतंजलि योग सूत्र में ‘संयम’. जबध्यान, धारणा और समाधि को किसी भी आवाज़ पर लगाया जाये तो उस आवाज़ में छिपा अर्थ अपने आप ही समझ आने लगता है. यहाँ तक कि पक्षियों की आवाज़े, जानवरों की आवाज़े, बदल क्या कह रहे है उसका अर्थ भी समझ आने लगता है. क्यूंकिआवाजों की अपनी ही एक भाषा होती है.
यादों के द्वार पर रह रह के देता है कोई दस्तक
बराबर ज़िंदगी आवाज़ पर आवाज़ देती है
(नज़ीर बनारसी)
एक अलग ही विज्ञानं है यह
एक अलग ही विज्ञानं है यह. आवाजो का विज्ञानं. सीखा जा सकता है. अभ्यास से, अभ्यास से ही आएगा. मुश्किल नहीं है. हर आवाज़ को ध्यान से सुनने की आदत डाल लीजिये बस . थोड़ी देर पक्षियों की आवाजो को सुनिए. किसी ऐसी जगह पर जाईये जहाँ बहुतसारेपक्षी हो. थोडा वक़्त उनके साथ गुजरियें. कुछ क्षण के लिए अपनेमनको चुप करवा कर पक्षियों की आवाज़ों पर ध्यान दीजिये. समझने की कौशिश कीजिये. केवल ऐसा करने से ही आनंद आएगा. मन को बहुत अच्छा लगेगा. यह भी एक तरह का ध्यान है. जबआपका घर पर ध्यान नहीं लग रहा हो तो यह ध्यान आपके काम आएगा. औरअगर इसका अभ्यास आगे बढ़ता चल गया तो इस विद्या को भी सीख जायेगे.
मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी
मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी. नका जन्म फारस देश के प्रसिद्ध नगर बल्ख़ में सन् 1207 में हुआ था। कमाल की बात यह है कि फारसीके मशहूर अध्यात्मिकशायरऔर सूफी के दिग्गज भी व्ही बात कह रहे है जो महर्षि पतंजलि ने कही है और भारतीय दर्शन शाश्त्र कहता है. हालाँकिमौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी काहिंदुस्तान की धरती से कोई खास वास्ता नहीं है क्यूंकि उनके जीवन का ज्यादातर हिस्सा युवावस्था में सीरिया के दमिश्क, एलेप्पो औरतुर्की, अफगानिस्तान में बीता.
अक्सर इनकी रचनाये पढ़ते पढ़ते मुझे लगता है कि मैं भगवद्गीता का कोई अध्याय पढ़ रहा हूँ, कभी लगता कि मैं पतंजलि योग सूत्र पढ़ रहा हूँ. उनकी लिखी एक रचना का एक भाग पढ़ कर सुनाता हूँ.
यक-नफ़से ख़मोश कुन दर ख़मुशी ख़रोश कुन
वक़्त-ए-सुख़न तू ख़ामुशी दर ख़मुशी तू नातिक़ी (रूमी)
एक क्षण के लिए चुप हो जाओ! और मौन की अवस्था में कलरव करो! जब तुम बोलते हो तो कुछ नहीं कह पाते पर जब चुप रहते हो तब तुम उत्तम वक्ता होते हो।
फिर वही बात
“अजीब शौर मचाने लगे है सन्नाटे,
ये किस तरह की खामौशी हर इक सदा में है”
(आसीम वास्ती)